बंगाल की खाड़ी। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ (Montha) अब एक प्रचंड रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह भयंकर तूफान आज शाम या रात तक आंध्र प्रदेश के काकीनाडा (Kakinada) तट के पास लैंडफॉल (Landfall) कर गया है। तट से टकराते समय इसकी रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच गई, जिससे तटीय इलाकों में भारी तबाही और व्यापक बारिश शुरू हो गई है।
मुख्य अपडेट और हाई अलर्ट
- लैंडफॉल पॉइंट: तूफान ने मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के पास तट को पार किया।
- तेज हवाएं और बारिश: तटीय आंध्र प्रदेश में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। चित्तूर और तिरुपति जैसे जिलों में पहले ही इसका असर दिखना शुरू हो चुका था।
- NDRF की तैनाती: आंध्र प्रदेश और ओडिशा दोनों राज्यों में आपदा प्रबंधन के लिए NDRF और ODRAF की 128 से अधिक टीमें तैनात की गई हैं।
- रेड अलर्ट: ओडिशा के मलकागिरी, कोरापुट, रायगड़ा, गजपति समेत दक्षिणी और तटीय जिलों में रेड अलर्ट जारी है, क्योंकि तूफान का व्यापक प्रभाव इन क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है।
किन राज्यों में बढ़ा खतरा?
तूफान का मुख्य केंद्र आंध्र प्रदेश का तट रहा, लेकिन इसका असर आसपास के राज्यों पर भी गंभीर रूप से पड़ा है:
- आंध्र प्रदेश: तटों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। काकीनाडा, विशाखापट्टनम और मछलीपट्टनम के पास सबसे अधिक नुकसान की आशंका है। निचले इलाकों में बाढ़ (Inundation) का खतरा बना हुआ है।
- ओडिशा: सरकार ने ‘जीरो कैजुअल्टी’ (Zero Casualty) का लक्ष्य रखा है। लगभग 32,000 लोगों को संवेदनशील तटीय क्षेत्रों से सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाया गया है।
- पश्चिम बंगाल: IMD ने बंगाल के दक्षिणी जिलों, खासकर कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है।
- तमिलनाडु: चेन्नई जैसे उत्तरी जिलों में भी चक्रवात के प्रभाव से मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है।
‘मोंथा’ नाम का मतलब
इस चक्रवाती तूफान को ‘मोंथा’ नाम थाईलैंड ने दिया है। थाई भाषा में इसका अर्थ ‘खुशबूदार या सुंदर फूल’ होता है, हालांकि इसका तांडव किसी फूल जैसा कोमल नहीं, बल्कि अत्यंत विनाशकारी है।
सरकार की तैयारियां
तटीय इलाकों के सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। मछुआरों को 29 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
आगे क्या होगा?
मौसम विभाग का अनुमान है कि तट से टकराने के बाद यह चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर होकर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल जाएगा, लेकिन इसका असर तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और झारखंड (बारिश के रूप में) तक महसूस किया जा सकता है।




