द हिन्दुस्तानी (मनोरंजन डेस्क)
जमशेदपुर। बीती शाम, नटखट छोटी के जन्मदिन की पार्टी में जमकर धमाल हुआ, लेकिन केक कटने के ठीक बाद एक ऐसा हास्यास्पद वाकया हुआ जिसने मेहमानों को खूब हंसाया, हालांकि सबसे छोटी बच्ची खुशी पल भर के लिए आहत हो गई। यह घटना बताती है कि घर के सबसे छोटे सदस्य कितने प्यारे होते हैं और कभी-कभी ‘समझदार’ बड़े उनकी खुशी में कैसे बाधा डाल देते हैं।
केक कटा, तो ‘खुशी’ की नज़र फिसली!
जैसे ही ‘छोटी’ ने केक काटा और तालियों की गड़गड़ाहट शांत हुई, सभी बच्चों की निगाहें केक पर टिक गईं। सबकी लाडली, ‘खुशी’, जो अक्सर हर मौके पर सबसे पहले पहुंचती है, उसने भी झट से अपना नन्हा हाथ केक के उस मुलायम टुकड़े की ओर बढ़ाया, जिसे देखकर उसके चेहरे पर दुनिया भर की खुशियाँ आ गई थीं। मानो कह रही हो, “यह मेरा है!”
गोलू का ‘ज्ञान’ और खुशी का ‘अपमान’!
लेकिन तभी, परिवार के ‘बुद्धिमान’ गोलू ने, जो शायद अपनी सेहत को लेकर ज़्यादा गंभीर नहीं रहते हैं, एक पल की भी देरी न करते हुए खुशी का हाथ पकड़ लिया। उन्होंने बड़े ही दार्शनिक अंदाज़ में कहा, “अरे रुको! इतनी जल्दी क्या है? अगर अभी इतना सारा केक खा लोगी, तो सुबह पॉटी में दिक्कत होगी।”
गोलू भैया का इतना गंभीर ‘स्वास्थ्य ज्ञान’ सुनते ही पार्टी में मौजूद सभी लोग हँस पड़े। बच्चों ने भी एक-दूसरे की तरफ देखा, मानो सोच रहे हों, “गोलू भैया भी ना, हर बात में डॉक्टर बन जाते हैं!”
खुशी हुई आहत, फिर हुई ‘मीठी’ ख़ुशी!
लेकिन उस पल के लिए, नन्हीं खुशी, जिसकी दुनिया सिर्फ उस केक के टुकड़े में समाई थी, वह ‘पॉटी’ वाली बात सुनकर आहत हो गई। उसके चेहरे पर मायूसी छा गई, जैसे किसी ने उसके सपने तोड़ दिए हों। मानो कह रही हो, “गोलू भैया ने मेरे केक और मेरी पॉटी, दोनों का मज़ा खराब कर दिया!”
हालाँकि, मेहमानों की हंसी और गोलू के जल्द ही माफी मांगने के बाद, खुशी को उसका केक का टुकड़ा मिल ही गया। उसने बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कान रोकी और केक खाने में व्यस्त हो गई।
यह घटना यह साबित करती है कि घर में बच्चे हों, तो हर छोटी-बड़ी बात भी एक यादगार और हास्यास्पद क्षण बन जाती है। और हाँ, बच्चों की खुशी पर ‘पॉटी’ की चिंता थोड़ी कम करनी चाहिए!




